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रक्षा बंधन स्पेशल

क्या मेरी भी कोई बहन है?
नहीँ?
क्यों नहीँ?
बस मैं ही अकेला हूँ अपने माँ बाप का!
पर कहते है कि आप दिल से किसी भी लड़की को अपनी बहन मान लो, तो वो बहन बन जाती है।।।।।

तो क्या वो सच में मुझे अपनी जान से ज्यादा चाहेगी?
क्या वो मेरे लिए खाने पे मेरा इंतज़ार करेगी?
अगर मैं देर से आया तो क्या वो मेरे लिए फ़िक्र करेगी जैसे मेरी माँ करती है?
मैने सुना है कि भाई को चोट लगे तो बहन रोदेती है क्योकि उसे वो दर्द महसूस होता है!
अगर मैं रस्ते में भीड़ में चलूँगा तो क्या वो मेरा हाथ थामेगी मुझे सही रास्ता दिखाने के लिए?
मेरी सारी गलतियों के लिए मुझे डाँटेगी, समझाएगी? पर माँ से नही बताएगी?
मैं क्या कर रहा हूँ? सो रहा हूं या जाग रहा हूं? ये देखने तो आएगी ना?
सर्दियों में मैं अक्सर अपनी रज़ाई नीचे गिरा देता हूं तो क्या वो मुझे मेरी रजाई ओढायेगी?
गर्मी में भी अपने हाथों से मुझे हवा करेगी ना?

अचानक ही रास्ते में मुझे आकार कुछ लगेगा तो क्या वो दौड़ के मेरे पास आएगी?
मुझे तो आलू पराठा पसंद है तो क्या वो भी मुझे बिना बताये चुप चाप आलू पराठा बनायेगी?

दोस्तों ये सब मैंने क्यों लिखा? क्योंकि ये सब वो हर बहन अपने भाई के लिए करती है जो कोई और नही कर सकता।।

ईश्वर ने दिया है प्रेम हमे, पर प्रेम तो वो है जो बहन है।
वो धूप में मेरी छाव भी है।
एक कच्चे से पर कोमल धागे में, पिरोदेती है अपनी कोमल सी अखिया जो सदा हमें देखती है, हमें आशीर्वाद देती है।

ये मैसेज संसार की हर बहन के नाम।
और मैं खुशनसीब हूँ क्योंकि मेरे पास बहन है।
- सुबोध चौहान

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