Skip to main content

सुवचन (विचार)

"युवा समाज सुधारक संघ"
सुविचार इस शब्द में ही विचार आता है और जहा विचारों की बाते होती है, क्यों ना महान लोगे के सुविचार पढ़े…
क्योकि जिन लोगों ने कुछ कर दिखाया उनके सुविचार जरुर हमारे लिए प्रेरणादायक होंगे..
सुविचार – सुविचार पढ़ने के बाद हमारे मन को एक नयी उर्जा मिलती है, जो हमें हमारे सभी काम सकारात्मक उर्जा के साथ करने के लिए प्रवृत करते है..

-अच्छे रहिए, अच्छे बनिए. लेकिन अच्छाई को अपनी कमजोरी मत बनने दीजिए.
-स्वतंत्र वही हो सकता है, जो अपना काम स्वयं कर लेता है.
-जब भी आपका अतीत आपको आवाज दे, तो उसे कोई जवाब मत दीजिए. क्योंकि उसके पास कहने के लिए कुछ नया नहीं होगा.
-छोटी-छोटी बातों को दिल से लगा लेने वाले लोग जिंदगी में कभी बड़ा काम नहीं कर सकते हैं.
-मनुष्य, मनुष्य का दास नहीं होता है, वह तो धन का दास होता है.
-न तो हर दर के आगे अपना सिर झुकाओ, और न हर किसी के आगे अपने हाथ फैलाओ. बुरा वक्त तो गुजर हीं जाएगा मेरे दोस्त, हालात के आगे मजबूर होकर यूँ अपनी जग हँसाई न करवाओ.
-जंजीरें, जंजीरें हीं होती है… चाहे वो लोहे की हो या सोने की. वे समान रूप से गुलाम बनाती है.
-कड़वी सच्चाई बोल देने वाले लोग, झूठा दिलासा देने वाले लोगों से लाख गुना अच्छे होते हैं.
-किसी पर फिर से विश्वास करने से कहीं आसान होता है, उसे भूल जाना.
कोई भी रिश्ता तब टूट जाता है, जब दो लोगों के बीच में कोई व्यक्ति ( चीज ) आ जाता है. इसलिए जिस रिश्ते को आप कभी नहीं टूटने देना चाहते हैं, उस रिश्ते के बीच किसी को भी न आने दें.
-लापरवाही का अंत पछतावे पर होता है.
-लापरवाही भरी जीवनशैली वाले लोग अंत में दया के पात्र बनकर रह जाते हैं.
यः क्रियावान स पण्डितः |
– जो क्रियावान है, वही विद्वान है.
उसकी चिंता मत करो, जो तुम्हारी चिंता नहीं करता है.
वीर भोग्या वसुंधरा |
– केवल वीर लोग हीं इस पृथ्वी को भोग पाते हैं.
सा विद्या या विमुक्तये |
– सच्ची विद्या वही है, जो हमें बन्धनों से मुक्त कर देती है.
व्यापारे वसते लक्ष्मी |
– व्यापार में हीं लक्ष्मी बसती है.

Comments

Popular posts from this blog

जो होगा अच्छा होगा

एक आदमी की नई नई शादी हुई और वो अपनी पत्नि के साथ वापिस आ रहे थे! रास्ते में वो दोनों एक बडी झील को नाव के द्वारा पार कर रहे थे, तभी अचानक एक भयंकर तूफ़ान आ गया ! वो आदमी वीर था लेकि...

सबकुछ परमात्मा पर छोड़ दो

एक पुरानी सी इमारत में वैद्यजी का मकान था। पिछले हिस्से में रहते थे और अगले हिस्से में दवाख़ाना खोल रखा था। उनकी पत्नी की आदत थी कि दवाख़ाना खोलने से पहले उस दिन के लिए आवश्यक सामान एक चिठ्ठी में लिख कर दे देती थी। वैद्यजी गद्दी पर बैठकर पहले भगवान का नाम लेते फिर वह चिठ्ठी खोलते। पत्नी ने जो बातें लिखी होतीं, उनके भाव देखते , फिर उनका हिसाब करते। फिर परमात्मा से प्रार्थना करते कि हे भगवान ! मैं केवल तेरे ही आदेश के अनुसार तेरी भक्ति छोड़कर यहाँ दुनियादारी के चक्कर में आ बैठा हूँ। वैद्यजी कभी अपने मुँह से किसी रोगी से फ़ीस नहीं माँगते थे। कोई देता था, कोई नहीं देता था किन्तु एक बात निश्चित थी कि ज्यों ही उस दिन के आवश्यक सामान ख़रीदने योग्य पैसे पूरे हो जाते थे, उसके बाद वह किसी से भी दवा के पैसे नहीं लेते थे चाहे रोगी कितना ही धनवान क्यों न हो। एक दिन वैद्यजी ने दवाख़ाना खोला। गद्दी पर बैठकर परमात्मा का स्मरण करके पैसे का हिसाब लगाने के लिए आवश्यक सामान वाली चिट्ठी खोली तो वह चिठ्ठी को एकटक देखते ही रह गए। एक बार तो उनका मन भटक गया। उन्हें अपनी आँखों के सामने तारे चमकते हुए नज़र आए किन्त...

इरादा पक्का होना चाहिए

"युवा समाज सुधारक संघ" *ek ek point dhayaan se pado* *Quote 1 .* जब लोग आपको *Copy* करने लगें तो समझ लेना जिंदगी में *Succes s* हो रहे हों. *Quoted 2 .* कमाओ…कमाते रहो और तब तक कमाओ, जब तक महंगी चीज सस्ती न लगने लगे. *Quote 3 .* जिस व्यक्ति के सपने...