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निस्वार्थ मदद

"युवा समाज सुधारक संघ"
एक बार दो व्यक्ति जंगल के रास्ते से गुजर रहे थे तभी उन्हें एक जंगली कुत्ता एक जाल में फँसा हुआ दिखाई दिया जो उससे निकलने की कोशिश कर रहा था पर निकल नहीं पा रहा था | तभी उन दोनों व्यक्तियों में से एक ने सोचा की उस कुत्ते की मदद की जाए और उसने रुककर उस कुत्ते की तरफ हाथ बढ़ाया पर वह कुत्ता उस व्यक्ति से डर रहा था और उसे ही गुर्रा रहा था पर फिर भी उस व्यक्ति ने उसकी मदद ज़ारी रखी तभी उसे दुसरे व्यक्ति ने उस कुत्ते की मदद करने से भी रोका पर वह नहीं माना और उसे हाथ में चोट भी लग गई पर उसने उस कुत्ते को जाल से आज़ाद कर दिया और दोनों व्यक्ति वहां से निकल गए |
कुछ दिनों बाद, वही व्यक्ति उसी जंगल से जा रहा था अचानक ही उसे दो चोरो ने घेर लिया और उस व्यक्ति को सभी सामान देने को कहा | तभी वहां वही जंगली कुत्ता आ गया और उसने उन दोनों चोरो को बहुत भौका और काटा जिससे दोनों भाग गए क्यूंकि वह कुत्ता उस व्यक्ति को पहचान गया था और उसने उस व्यक्ति की मदद के बदले उसकी सहायता की |
कहानी से प्रेरणा :-
सच्ची और अच्छी भावना का फल हमेशा सुखद होता हैं | अगर वह व्यक्ति उस कुत्ते की मदद नहीं करता तो उसे चोर लूट लेते लेकिन उसका निश्पष्क भावना ने उसे सुखद फल दिया |
Yuva-ss-sangh.blogspot.com

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