Skip to main content

जनकल्याण के लिए

"युवा समाज सुधारक संघ"
एक ऐसी बात .....जो झकझोर दे।

बहुत महत्वपूर्ण जानकारी है इसे नजरन्दाज ना करें। बेशक लाईक कमेंट न करें ! लेकिन पढ़ें जरुर।
गुड़गाँव में एक परिवार के स्कूल जाने वाले दो मासूम बच्चे सुबह अपने बिस्तर पर मृत पाये गये।
उनकी मृत्यु के संभव कारणों की जाँच-पड़ताल करते हुए उनके खाने-पीने की पूछताछ की गयी तो बच्चों की माँ ने बताया कि बच्चों ने बाहर की कोई चीज़ नहीं खायी थी। लेकिन रात को सोते समय रोज़ाना की तरह उनको एक गिलास दूध जरूर पिलाया गया था।
जब फ्रिज में रखे हुए दूध के भगौने की जाँच की गयी तो उसके तले में ३-४ इंच का एक साँप का बच्चा मरा हुआ पड़ा मिला। वह फ्रिज में कैसे पहुँचा और दूध के कटोरे में कैसे गिर गया?
परिवार ने याद करके बताया कि वे सब्जी मंडी से पालक लाये थे और उस गड्डी को बगैर खोले बगैर देखे फ्रिज में रखा था । हो सकता है उसी पालक की गड्डी में से निकलकर वह साँप का छोटा सा बच्चा दूध के भगौने में गिर गया होगा।
बेशक बच्चों की मौत का कारण तो स्पष्ट हो गया लेकिन परिवार ने अपने दो नौनिहाल बच्चे खो दिये।
इसलिए फ्रिज में कोई वस्तु विशेष रूप से पत्तेदार शब्जी रखने पर हमें बहुत सावधान रहना चाहिए तथा वस्तुओं को ढक कर ही फ्रिज में रखना चाहिए।
समय समय पर अपने फ्रीज की साफ़ सफाई भी करते रहे , घर में किचनमे कोई भी खाने की वस्तु बिना ढकी ना रखे । इस हादसे से सबक लेवें तभी इन मासूम बच्चों की आत्मा को शांति मिलेगी ।
यह पोस्ट काफी लाभप्रद लगी ,मैं इसलिए इसे पोस्ट कर रहा हूँ ताकि कहीं , कोई और अन्य ऐसी घटना की पुनरावृति ना हो पाए । अगर आप भी ऐसी ही सोच रखते हैं तो इसे पढ़ कर सिर्फ अपने पास तक सीमित मत रखिए बल्कि इसे आगे बढ़ाइए और मानवता की सेवा में थोड़ा योगदान दीजिऐ ।

जनकल्याण के लिए शेयर अवश्य करें |

धन्यवाद |
Yuva-ss-sangh.blogspot.com

Comments

Popular posts from this blog

जो होगा अच्छा होगा

एक आदमी की नई नई शादी हुई और वो अपनी पत्नि के साथ वापिस आ रहे थे! रास्ते में वो दोनों एक बडी झील को नाव के द्वारा पार कर रहे थे, तभी अचानक एक भयंकर तूफ़ान आ गया ! वो आदमी वीर था लेकि...

सबकुछ परमात्मा पर छोड़ दो

एक पुरानी सी इमारत में वैद्यजी का मकान था। पिछले हिस्से में रहते थे और अगले हिस्से में दवाख़ाना खोल रखा था। उनकी पत्नी की आदत थी कि दवाख़ाना खोलने से पहले उस दिन के लिए आवश्यक सामान एक चिठ्ठी में लिख कर दे देती थी। वैद्यजी गद्दी पर बैठकर पहले भगवान का नाम लेते फिर वह चिठ्ठी खोलते। पत्नी ने जो बातें लिखी होतीं, उनके भाव देखते , फिर उनका हिसाब करते। फिर परमात्मा से प्रार्थना करते कि हे भगवान ! मैं केवल तेरे ही आदेश के अनुसार तेरी भक्ति छोड़कर यहाँ दुनियादारी के चक्कर में आ बैठा हूँ। वैद्यजी कभी अपने मुँह से किसी रोगी से फ़ीस नहीं माँगते थे। कोई देता था, कोई नहीं देता था किन्तु एक बात निश्चित थी कि ज्यों ही उस दिन के आवश्यक सामान ख़रीदने योग्य पैसे पूरे हो जाते थे, उसके बाद वह किसी से भी दवा के पैसे नहीं लेते थे चाहे रोगी कितना ही धनवान क्यों न हो। एक दिन वैद्यजी ने दवाख़ाना खोला। गद्दी पर बैठकर परमात्मा का स्मरण करके पैसे का हिसाब लगाने के लिए आवश्यक सामान वाली चिट्ठी खोली तो वह चिठ्ठी को एकटक देखते ही रह गए। एक बार तो उनका मन भटक गया। उन्हें अपनी आँखों के सामने तारे चमकते हुए नज़र आए किन्त...

इरादा पक्का होना चाहिए

"युवा समाज सुधारक संघ" *ek ek point dhayaan se pado* *Quote 1 .* जब लोग आपको *Copy* करने लगें तो समझ लेना जिंदगी में *Succes s* हो रहे हों. *Quoted 2 .* कमाओ…कमाते रहो और तब तक कमाओ, जब तक महंगी चीज सस्ती न लगने लगे. *Quote 3 .* जिस व्यक्ति के सपने...