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4/23/2017

क्या ये ही है जिंदगी

जीवन के *20* साल हवा की तरह उड़ गए । फिर शुरू हुई *नोकरी* की खोज । ये नहीं वो , दूर नहीं पास । ऐसा करते करते *2 .. 3* नोकरियाँ छोड़ने एक तय हुई। थोड़ी स्थिरता की शुरुआत हुई।

फिर हाथ आया पहली तनख्वाह का *चेक*। वह *बैंक* में जमा हुआ और शुरू हुआ अकाउंट में जमा होने वाले *शून्यों* का अंतहीन खेल। *2- 3* वर्ष और निकल गए। बैंक में थोड़े और *शून्य* बढ़ गए। उम्र *27* हो गयी।

और फिर *विवाह* हो गया। जीवन की *राम कहानी* शुरू हो गयी। शुरू के *2 ..  4* साल नर्म , गुलाबी, रसीले , सपनीले गुजरे । हाथो में हाथ डालकर घूमना फिरना, रंग बिरंगे सपने। *पर ये दिन जल्दी ही उड़ गए*।

और फिर *बच्चे* के आने ही आहट हुई। वर्ष भर में *पालना* झूलने लगा। अब सारा ध्यान बच्चे पर केन्द्रित हो गया। उठना - बैठना, खाना - पीना, लाड - दुलार ।

समय कैसे फटाफट निकल गया, पता ही नहीं चला।
*इस बीच कब मेरा हाथ उसके हाथ से निकल गया, बाते- करना घूमना - फिरना कब बंद हो गया दोनों को पता ही न चला*।

*बच्चा* बड़ा होता गया। वो *बच्चे* में व्यस्त हो गयी, मैं अपने *काम* में । घर और गाडी की *क़िस्त*, बच्चे की जिम्मेदारी, शिक्षा और भविष्य की सुविधा और साथ ही बैंक में *शुन्य* बढाने की चिंता। उसने भी अपने आप काम में पूरी तरह झोंक दिया और मेने भी....

इतने में मैं *37* का हो गया। घर, गाडी, बैंक में *शुन्य*, परिवार सब है फिर भी कुछ कमी है ? पर वो है क्या समझ नहीं आया। उसकी चिड चिड बढती गयी, मैं उदासीन होने लगा।

इस बीच दिन बीतते गए। समय गुजरता गया। बच्चा बड़ा होता गया। उसका खुद का संसार तैयार होता गया। कब *10वि*   *anniversary*आई और चली गयी पता ही नहीं चला। तब तक दोनों ही *40 42* के हो गए। बैंक में *शुन्य* बढ़ता ही गया।

एक नितांत एकांत क्षण में मुझे वो *गुजरे* दिन याद आये और मौका देख कर उस से कहा " अरे जरा यहाँ आओ, पास बैठो। चलो हाथ में हाथ डालकर कही घूम के आते हैं।"

उसने अजीब नजरो से मुझे देखा और कहा कि " *तुम्हे कुछ भी सूझता* *है यहाँ ढेर सारा काम पड़ा है तुम्हे* *बातो की सूझ रही है*।"
कमर में पल्लू खोंस वो निकल गयी।

तो फिर आया *पैंतालिसवा* साल, आँखों पर चश्मा लग गया, बाल काला रंग छोड़ने लगे, दिमाग में कुछ उलझने शुरू हो गयी।

बेटा उधर कॉलेज में था, इधर बैंक में *शुन्य* बढ़ रहे थे। देखते ही देखते उसका *कॉलेज* ख़त्म। वह अपने पैरो पे खड़ा हो गया। उसके पंख फूटे और उड़ गया *परदेश*।

उसके *बालो का काला* रंग भी उड़ने लगा। कभी कभी दिमाग साथ छोड़ने लगा। उसे *चश्मा* भी लग गया। मैं खुद *बुढा* हो गया। वो भी *उमरदराज* लगने लगी।

दोनों *55* से *60* की और बढ़ने लगे। बैंक के *शून्यों* की कोई खबर नहीं। बाहर आने जाने के कार्यक्रम बंद होने लगे।

अब तो *गोली दवाइयों* के दिन और समय निश्चित होने लगे। *बच्चे* बड़े होंगे तब हम *साथ* रहेंगे सोच कर लिया गया घर अब बोझ लगने लगा। *बच्चे* कब *वापिस* आयेंगे यही सोचते सोचते बाकी के दिन गुजरने लगे।

एक दिन यूँ ही सोफे पे बेठा ठंडी हवा का आनंद ले रहा था। वो दिया बाती कर रही थी। तभी *फोन* की घंटी बजी। लपक के *फोन* उठाया। *दूसरी तरफ बेटा था*। जिसने कहा कि उसने *शादी* कर ली और अब *परदेश* में ही रहेगा।

उसने ये भी कहा कि पिताजी आपके बैंक के *शून्यों* को किसी *वृद्धाश्रम* में दे देना। और *आप भी वही रह लेना*। कुछ और ओपचारिक बाते कह कर बेटे ने फोन रख दिया।

मैं पुन: सोफे पर आकर बेठ गया। उसकी भी पूजा ख़त्म होने को आई थी। मैंने उसे आवाज दी *"चलो आज फिर हाथो में हाथ लेके बात करते हैं*"
*वो तुरंत बोली " अभी आई"।*

मुझे विश्वास नहीं हुआ। *चेहरा ख़ुशी से चमक उठा*। आँखे भर आई। आँखों से आंसू गिरने लगे और गाल भीग गए । अचानक आँखों की *चमक फीकी* पड़ गयी और मैं *निस्तेज* हो गया। हमेशा के लिए !!

उसने शेष पूजा की और मेरे पास आके बैठ गयी " *बोलो क्या बोल रहे थे*?"

लेकिन मेने कुछ नहीं कहा। उसने मेरे शरीर को छू कर देखा। शरीर बिलकुल *ठंडा* पड गया था। मैं उसकी और एकटक देख रहा था।

क्षण भर को वो शून्य हो गयी।
" *क्या करू*? "

उसे कुछ समझ में नहीं आया। लेकिन *एक दो* मिनट में ही वो चेतन्य हो गयी। धीरे से उठी पूजा घर में गयी। एक अगरबत्ती की। *इश्वर को प्रणाम किया*। और फिर से आके सोफे पे बैठ गयी।

मेरा ठंडा हाथ अपने हाथो में लिया और बोली
" चलो कहाँ घुमने चलना है तुम्हे ? क्या बातें करनी हैं तुम्हे*?" बोलो!!

ऐसा कहते हुए उसकी आँखे भर आई !!......
वो एकटक मुझे देखती रही। *आँखों से अश्रु धारा बह निकली*। मेरा सर उसके कंधो पर गिर गया। ठंडी हवा का झोंका अब भी चल रहा था।

क्या ये ही जिन्दगी है ? ?

सब अपना नसीब साथ लेके आते हैं इसलिए कुछ समय अपने लिए भी निकालो । जीवन अपना है तो जीने के तरीके भी अपने रखो। शुरुआत आज से करो। क्यूंकि कल कभी नहीं आएगा।
सभी मित्रों को समर्पित ये मार्मिक सच ,मित्रो अश्रु जरूर बहने देना रोकना नहीं बोझ कुछ कम हो जायेगा।  

🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

4/12/2017

हृदय स्पर्श करने वाली कहानी

"युवा समाज सुधारक संघ"

एक पाँच छ: साल का मासूम सा बच्चा अपनी छोटी बहन को लेकर मंदिर के एक तरफ कोने में बैठा हाथ जोडकर भगवान से न जाने क्या मांग रहा था ।

कपड़े में मैल लगा हुआ था मगर निहायत साफ, उसके नन्हे नन्हे से गाल आँसूओं से भीग चुके थे ।

बहुत लोग उसकी तरफ आकर्षित थे और वह बिल्कुल अनजान अपने भगवान से बातों में लगा हुआ था ।

जैसे ही वह उठा एक अजनबी ने बढ़ के उसका नन्हा सा हाथ पकड़ा और पूछा : -
"क्या मांगा भगवान से"
उसने कहा : -
"मेरे पापा मर गए हैं उनके लिए स्वर्ग,
मेरी माँ रोती रहती है उनके लिए सब्र,
मेरी बहन माँ से कपडे सामान मांगती है उसके लिए पैसे"..

"तुम स्कूल जाते हो"..?
अजनबी का सवाल स्वाभाविक सा सवाल था ।

हां जाता हूं, उसने कहा ।

किस क्लास में पढ़ते हो ? अजनबी ने पूछा

नहीं अंकल पढ़ने नहीं जाता, मां चने बना देती है वह स्कूल के बच्चों को बेचता हूँ ।
बहुत सारे बच्चे मुझसे चने खरीदते हैं, हमारा यही काम धंधा है ।
बच्चे का एक एक शब्द मेरी रूह में उतर रहा था ।

"तुम्हारा कोई रिश्तेदार"
न चाहते हुए भी अजनबी बच्चे से पूछ बैठा ।

पता नहीं, माँ कहती है गरीब का कोई रिश्तेदार नहीं होता,
माँ झूठ नहीं बोलती,
पर अंकल,
मुझे लगता है मेरी माँ कभी कभी झूठ बोलती है,
जब हम खाना खाते हैं हमें देखती रहती है ।
जब कहता हूँ
माँ तुम भी खाओ, तो कहती है मैने खा लिया था, उस समय लगता है झूठ बोलती है ।

बेटा अगर तुम्हारे घर का खर्च मिल जाय तो पढाई करोगे ?
"बिल्कुलु नहीं"

"क्यों"
पढ़ाई करने वाले, गरीबों से नफरत करते हैं अंकल,
हमें किसी पढ़े हुए ने कभी नहीं पूछा - पास से गुजर जाते हैं ।

अजनबी हैरान भी था और शर्मिंदा भी ।

फिर उसने कहा
"हर दिन इसी इस मंदिर में आता हूँ,
कभी किसी ने नहीं पूछा - यहाँ सब आने वाले मेरे पिताजी को जानते थे - मगर हमें कोई नहीं जानता ।

"बच्चा जोर-जोर से रोने लगा"

अंकल जब बाप मर जाता है तो सब अजनबी क्यों हो जाते हैं ?

मेरे पास इसका कोई जवाब नही था...

ऐसे कितने मासूम होंगे जो हसरतों से घायल हैं ।
बस एक कोशिश कीजिये और अपने आसपास ऐसे ज़रूरतमंद यतीमों, बेसहाराओ को ढूंढिये और उनकी मदद किजिए .........................

मंदिर मे सीमेंट या अन्न की बोरी देने से पहले अपने आस - पास किसी गरीब को देख लेना शायद उसको आटे की बोरी की ज्यादा जरुरत हो ।

आपको पसंद आऐ तो सब काम छोडके ये मेसेज कम से कम एक या दो गुरुप मे जरुर डाले ।
कहीं गुरुप मे ऐसा देवता ईन्सान मिल जाऐ ।
कहीं एसे बच्चो को अपना भगवान मील जाए ।
कुछ समय के लिए एक गरीब बेसहारा की आँख मे आँख डालकर देखे, आपको क्या महसूस होता है ।

फोटो या विडीयो भेजने कि जगह ये मेसेज कम से कम एक या दो गुरुप मे जरुर डाले ।

स्वयं में व समाज में बदलाव लाने के प्रयास जारी रखें ।
https://yuva-ss-sangh.blogspot.com

3/31/2017

अनमोल वचन

"युवा समाज सुधारक संघ"
👌🏿 *"अनमोल संदेश"* 👌🏿

दुनिया की ताकतवर चीज है *"लोहा"*🔩
       जो सबको काट डालता है ....

लोहे से ताकतवर है *"आग"*🔥
        जो लोहे को पिघला देती है....

आग से ताकतवर है *"पानी"*🌧
        जो आग को बुझा देता है....

और पानी से ताकतवर है *"इंसान"*👦
        जो उसे पी जाता है....

इंसान से भी ताकतवर है *"मौत"*😭
         जो उसे खा जाती है....

और मौत से भी ताकतवर है *"दुआ"* 👏🏿
      जो मौत को भी टाल सकती है...!

🙏🏿बहुत ही सुन्दर वर्णन है🙏🏿

👌🏿मस्तक को थोड़ा झुकाकर देखिए
....अभिमान मर जाएगा

👌🏿आँखें को थोड़ा भिगा कर देखिए
.....पत्थर दिल पिघल जाएगा

👌🏿दांतों को आराम देकर देखिए
.........स्वास्थ्य सुधर जाएगा

👌🏿जिव्हा पर विराम लगा कर देखिए
.....क्लेश का कारवाँ गुज़र जाएगा

👌🏿इच्छाओं को थोड़ा घटाकर देखिए
......खुशियों का संसार नज़र आएगा

👌🏿पूरी जिंदगी हम इसी बात में गुजार देते हैं कि "चार लोग क्या कहेंगे",

........और अंत में चार लोग बस यही कहते हैं कि "राम नाम सत्य है"...

                  👁🙏🏿

*"उड़ा भी दो सारी रंजिशें इन हवाओं में*
                        *यारो"*

  *"छोटी सी जिंदगी है नफ़रत कब*
                   *तक करोगे"*

*"घमंड न करना जिन्दगी मे तकदीर बदलती*
                          *रहती है"*

*"शीशा वही रहता है  बस तस्वीर बदलती रहती है"*

🙏🏿🙏🏿🙏🏿🙏🏿🙏🏿
https://yuva-ss-sangh.blogspot.com

जो भाग्य में न हो, नही मिलता

एक बार अवश्य पढे.

एक सेठ जी थे  - 🍆🍀🌺🍆🌺
जिनके पास काफी दौलत थी.  🍆🍀🌺🍆🍀🌺
सेठ जी ने अपनी बेटी की शादी एक बड़े घर में की थी.
परन्तु बेटी के भाग्य में सुख न होने के कारण उसका पति जुआरी, शराबी निकल गया.  🍆🍀🌺🍆🍀🌺
जिससे सब धन समाप्त हो गया.
🍆🍀🌺🍆🍀🌺🍆🍀🌺
बेटी की यह हालत देखकर सेठानी जी रोज सेठ जी से कहती कि आप दुनिया की मदद करते हो, 🌺🍀🍆🍀🌺
मगर अपनी बेटी परेशानी में होते हुए उसकी मदद क्यों नहीं करते हो?
🍆🍀🌺🍆🍀🌺
सेठ जी कहते कि 🍆🍀🌺
"जब उनका भाग्य उदय होगा तो अपने आप सब मदद करने को तैयार हो जायेंगे..."
🍆🍀🌺🍆🍀🌺🍆🍀🌺
एक दिन सेठ जी घर से बाहर गये थे कि, तभी उनका दामाद घर आ गया. 🌺🍀🍆🌺🍀
सास ने दामाद का आदर-सत्कार किया और बेटी की मदद करने का विचार उसके मन में आया कि क्यों न मोतीचूर के लड्डूओं में अर्शफिया रख दी जाये...
🍀🍆🌺🍆🌺🍆🍀🌺
यह सोचकर सास ने लड्डूओ के बीच में अर्शफिया दबा कर रख दी और दामाद को टीका लगा कर विदा करते समय पांच किलों शुद्ध देशी घी के लड्डू, जिनमे अर्शफिया थी, दिये...
🍀🍀🍀
दामाद लड्डू लेकर घर से चला, 🍆🍀🌺🍆🍀🌺🍆🍀🌺
दामाद ने सोचा कि इतना वजन कौन लेकर जाये क्यों न यहीं मिठाई की दुकान पर बेच दिये जायें और दामाद ने वह लड्डुयों का पैकेट मिठाई वाले को बेच दिया और पैसे जेब में डालकर चला गया.
🌺🍆🍀🌺🍆🍀🌺
उधर सेठ जी बाहर से आये तो उन्होंने सोचा घर के लिये मिठाई की दुकान से मोतीचूर के लड्डू लेता चलू और सेठ जी ने दुकानदार से लड्डू मांगे...मिठाई वाले ने वही लड्डू का पैकेट सेठ जी को वापिस बेच दिया. 
🍆🍀🌺🍆🍀🌺🍆🍀🌺🍆🍀🌺
सेठ जी लड्डू लेकर घर आये.. सेठानी ने जब लड्डूओ का वही पैकेट देखा तो सेठानी ने लड्डू फोडकर देखे, अर्शफिया देख कर अपना माथा पीट लिया. 🌺🌺🍀🌺🍀🍆
सेठानी ने सेठ जी को दामाद के आने से लेकर जाने तक और लड्डुओं में अर्शफिया छिपाने की बात कह डाली...
🌺🍀🌺🍆🌺🍀🌺🌺🍀
सेठ जी बोले कि भाग्यवान मैंनें पहले ही समझाया था कि अभी उनका भाग्य नहीं जागा...
देखा मोहरें ना तो दामाद के भाग्य में थी और न ही मिठाई वाले के भाग्य में... 🌺🍀🌺🍀🌺🍀🌺

इसलिये कहते हैं कि भाग्य से
ज्यादा 🍀🍆🍀🍆🍀
और...
समय 🍀🍆
से पहले न किसी को कुछ मिला है और न मीलेगा!ईसी लिये ईशवर जितना दे उसी मै संतोष करो...🍆🍀🌺🍆🍀🌺🍆🍀🌺
झूला जितना पीछे जाता है, उतना ही आगे आता है।एकदम बराबर।🌺🍀🌺🍀🌺🍀🌺🍀🌺🍀
सुख और दुख दोनों ही जीवन में बराबर आते हैं।
🌺🌺🌺🌺🌺
जिंदगी का झूला पीछे जाए, तो डरो मत, वह आगे भी आएगा।
🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺
बहुत ही खूबसूरत लाईनें.

.किसी की मजबूरियाँ पे न हँसिये,
कोई मजबूरियाँ ख़रीद कर नहीं लाता..!
🌺🌺🌺🌺🌺🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻
डरिये वक़्त की मार से,बुरा वक़्त किसीको बताकर नही आता..!
🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺
अकल कितनी भी तेज ह़ो,नसीब के बिना नही जीत सकती..!
बीरबल अकलमंद होने के बावजूद,कभी बादशाह नही बन सका...!!
🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺
""ना तुम अपने आप को गले लगा सकते हो, ना ही तुम अपने कंधे पर सर रखकर रो सकते हो एक दूसरे के लिये जीने का नाम ही जिंदगी है!
🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺
इसलिये वक़्त उन्हें दो जो तुम्हे चाहते हों दिल से!
🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺
रिश्ते पैसो के मोहताज़ नहीं होते क्योकि कुछ रिश्ते मुनाफा नहीं देते पर जीवन अमीर जरूर बना देते है🍆!!! "☝☝☝🌺🍀🌺

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3/22/2017

सुवचन

"युवा समाज सुधारक संघ"
, ✍✍ *"गलती पर साथ छोड़ने वाले तो बहुत मिलते है*
                पर
*गलती पर समझा कर साथ निभाने वाले बहुत कम मिलते है*                                          🌹 *"हमारी सभी अंगुलियां लंबाई में बराबर नहीं होती हैं,*
*किन्तु जब वे मुड़ती हैं तो बराबर दिखती हैं..!!"*

*इसी प्रकार यदि हम किन्हीं परिस्थितियों में थोड़ा सा झुक जातें है या तालमेल बिठा लेते हैं तो ज़िन्दगी बहुत आसान व् आनंदित हो जाती है।*🌹

      *""सदा मुस्कुराते रहिये""*
*🌹हँसते रहिये हंसाते रहिये🌹*
          🍁 *सुप्रभात* 🍁

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